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Shravan Month 2017


Category: Religious | Posted :Monday, July 10, 2017

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Shravan Month 2017

सावन महीना 2017

 
सावन का महीना १० जुलाई सोमवार ७ अगुएस्त सोमवार तक
 
हिन्दू धर्म में सावन महीने को महादेव भगवान शंकर का महीना माना जाता है। चैत्र के पांचवे महीने को सावन का महीना कहा जाता है। कहा जाता है कि सावन साल का सबसे पवित्र महीना होता है। भारत के सभी शिवालयों में श्रावण सोमवार पर हर-हर महादेव और बोल बम बोल की गूँज सुनाई देगी। श्रावण मास में शिव-पार्वती का पूजन बहुत फलदायी होता है। इसलिए सावन मास का बहुत महत्व है।
 
ऐसी मान्यता है कि इस माह का प्रत्येक दिन किसी भी देवी-देवता की आराधना करने के लिए सबसे उपयुक्त होता है, विशेष तौर पर इस माह में भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। इस बार सावन का महीना १० जुलाई सोमवार से शुरू हो रहा है जो  ०७ अगस्त सोमवार को रक्षाबंधन पूर्णिमा तक चलेगा। इस महीने के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव पर जल चढ़ाना शुभ और फलदायी माना जाता है। काफी सालों बाद इस बार सावन मास में पांच सोमवार है। भगवान भोले नाथ को प्रकृति का देवता माना जाता है तभी तो इस माह में हरियाली भी पूरी तरह से झूमकर भगवान भोलेनाथ का स्वागत करने के लिए हमेशा तैयार रहती है।
 
 
सावन से जुड़ी है ये कथा
 
पुराणों में सावन से जुड़ी पौराणिक कथाएं मिलती है। कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष का पान करने से भगवान शिव के शरीर का तापमान तेज गति से बढ़ने लगा था। ऐसे में शरीर को शीतल रखने के लिए भोलेनाथ ने चंद्रमा को अपने सिर पर धारण किया और अन्य देव उन पर जल की वर्षा करने लगे। इन्द्र देव भी यह चाहते थे कि भगवान शिव के शरीर का तापमान कम हो जाए इसलिए उन्होंने अपने तेज से मूसलाधार बारिश कर दी। इस वजह से सावन के महीने में अत्याधिक बारिश होती है, जिससे भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं।
 
 
सावन में शिवशंकर की पूजा
 
सावन में भोले शंकर की पूजा, अभिषेक, शिव स्तुति, मंत्र जाप का खास महत्व है। खासकर सोमवारी के दिन महादेव की आराधना से शिव और शक्ति दोनों प्रसन्न होते हैं।इनकी कृपा से दैविक, दैहिक और भौतिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।  सावन के महीने में भगवान शंकर की विशेष रूप से पूजा की जाती है। इस दौरान पूजन की शुरूआत महादेव के अभिषेक के साथ की जाती है। अभिषेक में महादेव को जल, दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, गंगाजल, गन्ना रस आदि से स्नान कराया जाता है। अभिषेक के बाद बेलपत्र, समीपत्र, दूब, कुशा, कमल, नीलकमल, ऑक मदार, जंवाफूल कनेर, राई फूल आदि से शिवजी को प्रसन्न किया जाता है। इसके साथ की भोग के रूप में धतूरा, भाँग और श्रीफल महादेव को चढ़ाया जाता है।
 
सावन महीने को देवों के देव महादेव भगवान शंकर का महीना माना जाता है। इस संबंध में पौराणिक कथा है कि जब सनत कुमारों ने महादेव से उन्हें सावन महीना प्रिय होने का कारण पूछा तो महादेव भगवान शिव ने बताया कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने युवावस्था के सावन महीने में निराहार रह कर कठोर व्रत किया और उन्हें प्रसन्न कर विवाह किया, जिसके बाद ही महादेव के लिए यह विशेष हो गया। 
 
 
बेलपत्र  ने दिलाया वरदान
 
बेलपत्र महादेव को प्रसन्न करने का सुलभ माध्यम है। बेलपत्र के महत्व में एक पौराणिक कथा के अनुसार एक भील डाकू परिवार का पालन-पोषण करने के लिए लोगों को लूटा करता था। सावन महीने में एक दिन डाकू जंगल में राहगीरों को लूटने के इरादे से गया। एक पूरा दिन-रात बीत जाने के बाद भी कोई शिकार नहीं मिलने से डाकू काफी परेशान हो गया। इस दौरान डाकू जिस पेड़ पर छुपकर बैठा था, वह बेल का पेड़ था और परेशान डाकू पेड़ से पत्तों को तोड़कर नीचे फेंक रहा था। डाकू के सामने अचानक महादेव प्रकट हुए और वरदान माँगने को कहा। अचानक हुई शिव कृपा जानने पर डाकू को पता चला कि जहाँ वह बेलपत्र फेंक रहा था उसके नीचे शिवलिंग स्थापित है। इसके बाद से बेलपत्र का महत्व और बढ़ गया।
सावन मास में शिव मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है। शिवभक्त अनेक धार्मिक नियमों का पालन करते हैं। साथ ही महादेव को प्रसन्न करने के लिए तो कोई पूरे सावन भर अपने केश नहीं कटाएगा। वहीं कितनों ने माँस और मदिरा का त्याग कर दिया। शिवभक्त सावन के प्रत्येक सोमवार व्रत करते और महादेव पार्वती प्रसन्न होकर शिवभक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूरी करते हैं।.
 
 
 
शिवभक्तों की कंवर  यात्रा   
 
कवर यात्रा एक महीने की लंबी रस्म है शिवालयों में जल चढ़ाने के लिए लोग बोल बम के नारे लगाते घरों से निकलते हैं। भक्त भगवा वस्त्र धारण कर शिवालयों की ओर कूच करते हैं। और चुने हुए तीर्थ स्थलों से पवित्र जल लेने के लिए नंगे पाँव चलते हैं। शिवभक्त काँवरियों में जल लेकर शिवधाम की ओर निकल पड़ते हैं। भक्त तब अपने गृहनगर में लौटते हैं और स्थानीय मंदिर में शिवलिंग का अभिषेक पवित्र जल से करते हैं। सावन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तीथ मासा शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है यह उनके जीवन में सभी भाग्यशाली चीज़ों के लिए धन्यवाद के रूप में माना जाता है। कवर यात्रा के दौरान देखभाल करने के लिए केवल एक चीज यह है कि मिट्टी के बर्तनों को यात्रा के किसी भी समय जमीन को नहीं छूना चाहिए। यात्रा के दौरान कई अस्थायी खड़ा बनाए गए हैं, जिससे कनवारी थोड़ी देर के लिए आराम कर सकते हैं। शिव की स्तुति में 'बोल बम' और धार्मिक भजनों का भजन करते अपनी कवर यात्रा पूरी करते हैं। सावन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि शिवरात्रि के रूप में मनाई जाती है इस वर्ष शिवरात्रि 21 जुलाई Friday की होगी। सभी शिव मंदिरों में बम बम भोले शंकर  की जय जय कार होगी।  कंवर की सेवा भी एक शुभ कार्य माना जाता है यात्रा के विभिन्न क्षेत्रों में कई एनजीओ मुफ्त भोजन, पानी, चाय या चिकित्सा सहायता की पेशकश करते हैं। हालांकि इन संगठनों में से ज्यादातर श्रवण के महीने में कार्यरत हैं, लेकिन कुछ साल पहले ही बोल बम सेवा समिति जैसे गैर-सरकारी संगठनों का काम चल रहा है। ये संगठन दान के माध्यम से कार्य करते हैं। शिवभक्त काँवरियों की सेवा कर के पूनय कमातैं हैं।


 

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